टैक्स और सैलरी कैलकुलेटर

नए और पुराने टैक्स सिस्टम की तुलना करें, इन-हैंड सैलरी जानें, और HRA, TDS, कैपिटल गेन व GST का हिसाब लगाएँ।

इनकम टैक्स कैलकुलेटरFY 2026-27 के लिए नए और पुराने टैक्स सिस्टम में अपने टैक्स की तुलना करें और जानें कौन सा ज़्यादा बचाता है।सैलरी कैलकुलेटर (CTC से इन-हैंड)जानें कि PF, ग्रेच्युटी, प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स के बाद आपके CTC का कितना हिस्सा हर महीने बैंक में आता है।सैलरी हाइक कैलकुलेटरहाइक के बाद अपनी नई सैलरी देखें, या पुरानी और नई सैलरी से हाइक प्रतिशत निकालें।HRA कैलकुलेटरतीन नियमों वाले फ़ॉर्मूले और बड़े शहरों की नई सूची से जानें कि आपके हाउस रेंट अलाउंस का कितना हिस्सा टैक्स-फ़्री है।ग्रेच्युटी कैलकुलेटरअपनी आख़िरी बेसिक सैलरी और नौकरी के सालों से ग्रेच्युटी निकालें, और देखें कि उसमें से कितनी टैक्स-फ़्री है।कैपिटल गेन टैक्स कैलकुलेटरशेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या सोना बेचने के मुनाफ़े पर टैक्स, और टैक्स के बाद आपके हाथ में बची रकम जानें।TDS कैलकुलेटरजानें कि ब्याज, किराया, फ़ीस, जीत या प्रॉपर्टी ख़रीद पर कितना TDS कटेगा और आपको कितनी रकम मिलेगी।GST कैलकुलेटरकीमत में GST जोड़ें, या GST सहित रकम से असली कीमत निकालें, CGST-SGST या IGST के बँटवारे के साथ।

भारत में टैक्स के नियम लगभग हर बजट में बदलते हैं। ये कैलकुलेटर नए इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत FY 2026-27 के नियमों पर चलते हैं, और हर पेज नतीजे के पीछे के स्लैब, सीमाएँ और सेक्शन आसान भाषा में समझाता है।

कौन-सा कैलकुलेटर इस्तेमाल करें?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मेरे लिए कौन-सा टैक्स सिस्टम बेहतर है?

नए सिस्टम में दरें कम हैं और ₹12 लाख की टैक्स वाली आमदनी तक कोई टैक्स नहीं (नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद ₹12.75 लाख), लेकिन इसमें बहुत कम छूट मिलती हैं। अगर आप HRA, होम लोन ब्याज और 80C जैसी बड़ी छूट लेते हैं, तो पुराना सिस्टम बेहतर हो सकता है। इनकम टैक्स कैलकुलेटर दोनों दिखाता है ताकि आप तुलना कर सकें।

क्या ये कैलकुलेटर नए इनकम-टैक्स एक्ट के हिसाब से अपडेट हैं?

हाँ। ये FY 2026-27 के स्लैब और 1 अप्रैल 2026 से लागू नए सेक्शन नंबर इस्तेमाल करते हैं। हम हर बजट के बाद इन्हें जाँचते हैं।

क्या नतीजा मेरा बिल्कुल सही टैक्स है?

आम मामलों के लिए यह क़रीबी अनुमान है। दूसरी आमदनी, ख़ास दरों, छूट और सरचार्ज के नियमों की वजह से असली टैक्स अलग हो सकता है। रिटर्न भरने से पहले टैक्स विशेषज्ञ से पक्का करें।