EMI कैलकुलेटर

किसी भी होम, कार या पर्सनल लोन की मासिक EMI, कुल ब्याज और पूरा भुगतान शेड्यूल जानें।

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साल

नतीजा

हर महीने की EMI
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मूल राशि
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कुल ब्याज
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कुल भुगतान
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  • मूल राशि—
  • कुल ब्याज—

सालों के साथ बकाया लोन

EMI (Equated Monthly Instalment) वह तय रकम है जो लोन पूरा चुकने तक आप हर महीने बैंक को देते हैं। हर EMI के दो हिस्से होते हैं: बचे हुए लोन पर ब्याज, और मूलधन (principal) का एक छोटा हिस्सा। शुरुआती सालों में EMI का ज़्यादातर हिस्सा ब्याज में जाता है। जैसे-जैसे बकाया घटता है, EMI का बड़ा हिस्सा मूलधन चुकाने में जाने लगता है।

लोन के लिए अप्लाई करने से पहले EMI ज़रूर जाँचें। इससे पता चलता है कि लोन आपके महीने के बजट में फ़िट होगा या नहीं, और अलग-अलग बैंकों के ऑफ़र की सही तुलना हो पाती है।

EMI कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें

  1. जितना लोन लेना है, वह लोन राशि डालें।
  2. बैंक की सालाना ब्याज दर डालें।
  3. लोन की अवधि साल में चुनें।
  4. हर महीने की EMI, कुल ब्याज और कुल भुगतान तुरंत दिख जाएगा। साल-दर-साल हिसाब खोलकर देखें कि हर साल कितना मूलधन और कितना ब्याज चुकाया गया और कितना बकाया बचा।

EMI का फ़ॉर्मूला

EMI = P × r × (1 + r)^n ÷ ((1 + r)^n − 1)
  • P = लोन राशि (मूलधन)
  • r = मासिक ब्याज दर = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
  • n = कुल किस्तें = अवधि (साल) × 12

उदाहरण

आपने ₹10,00,000 का होम लोन 8.5% सालाना ब्याज पर 20 साल के लिए लिया।

  • r = 8.5 ÷ 12 ÷ 100 = 0.007083
  • n = 20 × 12 = 240 महीने
  • EMI = ₹8,678 हर महीने
  • कुल भुगतान = ₹20,82,776
  • कुल ब्याज = ₹10,82,776

यानी 20 साल में आप जितना लोन लिया, उससे ज़्यादा सिर्फ़ ब्याज में चुकाते हैं। इसीलिए अवधि और ब्याज दर इतनी मायने रखती हैं।

अवधि बदलने से कुल ख़र्च पर असर

₹10 लाख का लोन, 8.5% ब्याज, अलग-अलग अवधि:

अवधिमासिक EMIकुल ब्याजकुल भुगतान
10 साल₹12,399₹4,87,828₹14,87,828
15 साल₹9,847₹7,72,531₹17,72,531
20 साल₹8,678₹10,82,776₹20,82,776
25 साल₹8,052₹14,15,681₹24,15,681
30 साल₹7,689₹17,68,089₹27,68,089

लोन 20 से 30 साल करने पर EMI सिर्फ़ ₹989 घटती है, लेकिन ब्याज लगभग ₹7 लाख बढ़ जाता है।

थोड़ी सी ब्याज दर का बड़ा फ़र्क

₹10 लाख, 20 साल के लिए:

ब्याज दरमासिक EMIकुल ब्याज
8.0%₹8,364₹10,07,456
8.5%₹8,678₹10,82,776
9.0%₹8,997₹11,59,342
9.5%₹9,321₹12,37,115
10.0%₹9,650₹13,16,052

हर ₹10 लाख के लोन पर 0.5% कम ब्याज दर से 20 साल में लगभग ₹75,000 बचते हैं।

लोन सस्ता करने के तरीके

  • जब भी हो सके, प्रीपेमेंट करें। अतिरिक्त भुगतान सीधे मूलधन घटाता है, और उस रकम पर ब्याज लगना बंद हो जाता है। RBI के नियमों के अनुसार, व्यक्तिगत (नॉन-बिज़नेस) फ़्लोटिंग रेट लोन पर बैंक प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं ले सकते।
  • जितनी कम अवधि आराम से चुका सकें, वही चुनें। ऊपर की टेबल से फ़र्क देखें।
  • सिर्फ़ ब्याज दर नहीं, पूरा ख़र्च देखें। प्रोसेसिंग फ़ीस, लोन के साथ जोड़ा गया बीमा और दूसरे चार्ज भी पूछें।
  • क्रेडिट स्कोर अच्छा रखें। अच्छे रिकॉर्ड वालों को आमतौर पर कम ब्याज दर मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या कम EMI का मतलब सस्ता लोन है?

नहीं। लंबी अवधि से EMI कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज बढ़ जाता है। सिर्फ़ EMI नहीं, कुल भुगतान की तुलना करें।

क्या पूरे लोन में EMI एक जैसी रहती है?

फ़िक्स्ड रेट लोन में हाँ। भारत में ज़्यादातर होम लोन फ़्लोटिंग रेट पर होते हैं, जो RBI रेपो रेट जैसे बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। बेंचमार्क बदलने पर बैंक आपकी EMI या बची हुई अवधि बदल देता है।

कितनी EMI लेना ठीक रहता है?

ज़्यादातर बैंक चाहते हैं कि आपकी सारी EMI मिलाकर हाथ में आने वाली मासिक आमदनी के 40–50% से कम रहें। इससे कम रखेंगे तो बचत और इमरजेंसी के लिए गुंजाइश बनी रहेगी।

क्या इसमें प्रोसेसिंग फ़ीस या बीमा शामिल है?

नहीं। यह सिर्फ़ मूलधन और ब्याज का हिसाब करता है। फ़ीस या बीमा का ख़र्च अलग से जोड़ें।

क्या यह कार, पर्सनल और एजुकेशन लोन के लिए भी काम करता है?

हाँ। घटते बैलेंस वाले सभी लोन में EMI का फ़ॉर्मूला एक ही है। बस अपने ऑफ़र की लोन राशि, ब्याज दर और अवधि डालें। महीनों में अवधि के लिए आधा साल डालें, जैसे 18 महीने के लिए 1.5 साल।